किसके दबाये दबा है …..

किसके दबाये दबा है जुनुने इश्क ज़माने में

गए जिंदगी से तुम तो आ गए फसाने में

प्यार का अक्स नहीं है ऐशों के शीशमहल में

मिले

 

गा  वह गुजिश्ता यादों के तहखाने में

जाहिद न दिखे न मिले जो दैरो हरम में

जा के तलाश करो उसको किसी मैखाने में

साक़िया खुदा ना मिला काशी और काबे में

 

कभी कभी झलक जाता है वो तेरे पैमाने में

शमा की लौ छुए तो खुद जल कर राख हो

बाकी है अब भी इतनी आग इस परवाने में

मात देने के मजे तो

 

बला के  दिलकश हैं

बड़ा लुत्फ़ आता है उनसे मात खाने में

कभी

अपना घर लुटा हम खुशनसीब हो गए

अपना घर  लुटा हम खुशनसीब हो गए

उनसे  दूर जाकर उनके और करीब हो गए

दोस्त को बना नामावर भेजी प्यार की खबर

यार की सूरत देख वो   भी रकीब हो गए

जो चहक के मिलते थे नजर चुरा गुजरते हैं

मुफ़लिसी में हम नहीं हुए दोस्त क्यों अजीब हो गए

जब से कीलों बिंधा मसीहा का बदन दिखा

दुनियां के ऐशो आराम मानों सलीब हो गए

सब कुछ बाँट बिखेर , हम तो हुए अमीर

जिन्होंने जोड़ना शुरू किया वो गरीब हो गए

नदी , पुल और रेल

नदी जो उन्मुक्त बहती है

मुझे सुन्दर मासूम लड़की से

कहीं भोली भली लगती है

पुल जो सबको पार कराते हैं

वे  परोपकारी भलेमानस

मुझे संतों से सुहाते हैं

 

रेल जो सबको साथ ढोती है

सब रंगों सब धर्मों की

संयुक्त दुनियां होती है

नदी जितनी जंगली,पहाढ़ वाली

और हो खतरनाक कटाववाली

मुझे उतनी ही आकर्षक लगती है

नए पंखों का जोड़ा

जब से उगा नये पंखों का जोड़ा है

ये सारा आकाश मेरे लिए छोटा है

मिले हैं जब दो मजबूत हाथ तुझे

कैसे कहता है कि नसीब तेरा खोटा है

मुस्करा के दर्द पी ले तो जीना है

वरना यहाँ हर कोई बस रोता है

हाथ बढ़ा कर बदल ले तकदीर

खुदबखुद यहाँ कुछ नहीं होता है l