नदी , पुल और रेल

नदी जो उन्मुक्त बहती है

मुझे सुन्दर मासूम लड़की से

कहीं भोली भली लगती है

पुल जो सबको पार कराते हैं

वे  परोपकारी भलेमानस

मुझे संतों से सुहाते हैं

 

रेल जो सबको साथ ढोती है

सब रंगों सब धर्मों की

संयुक्त दुनियां होती है

नदी जितनी जंगली,पहाढ़ वाली

और हो खतरनाक कटाववाली

मुझे उतनी ही आकर्षक लगती है

Advertisements