Watch “Shammi Kapoor’s Love Story” on YouTube

Advertisements

किसके दबाये दबा है …..

किसके दबाये दबा है जुनुने इश्क ज़माने में

गए जिंदगी से तुम तो आ गए फसाने में

प्यार का अक्स नहीं है ऐशों के शीशमहल में

मिले

 

गा  वह गुजिश्ता यादों के तहखाने में

जाहिद न दिखे न मिले जो दैरो हरम में

जा के तलाश करो उसको किसी मैखाने में

साक़िया खुदा ना मिला काशी और काबे में

 

कभी कभी झलक जाता है वो तेरे पैमाने में

शमा की लौ छुए तो खुद जल कर राख हो

बाकी है अब भी इतनी आग इस परवाने में

मात देने के मजे तो

 

बला के  दिलकश हैं

बड़ा लुत्फ़ आता है उनसे मात खाने में

कभी

अपना घर लुटा हम खुशनसीब हो गए

अपना घर  लुटा हम खुशनसीब हो गए

उनसे  दूर जाकर उनके और करीब हो गए

दोस्त को बना नामावर भेजी प्यार की खबर

यार की सूरत देख वो   भी रकीब हो गए

जो चहक के मिलते थे नजर चुरा गुजरते हैं

मुफ़लिसी में हम नहीं हुए दोस्त क्यों अजीब हो गए

जब से कीलों बिंधा मसीहा का बदन दिखा

दुनियां के ऐशो आराम मानों सलीब हो गए

सब कुछ बाँट बिखेर , हम तो हुए अमीर

जिन्होंने जोड़ना शुरू किया वो गरीब हो गए

नदी , पुल और रेल

नदी जो उन्मुक्त बहती है

मुझे सुन्दर मासूम लड़की से

कहीं भोली भली लगती है

पुल जो सबको पार कराते हैं

वे  परोपकारी भलेमानस

मुझे संतों से सुहाते हैं

 

रेल जो सबको साथ ढोती है

सब रंगों सब धर्मों की

संयुक्त दुनियां होती है

नदी जितनी जंगली,पहाढ़ वाली

और हो खतरनाक कटाववाली

मुझे उतनी ही आकर्षक लगती है

नए पंखों का जोड़ा

जब से उगा नये पंखों का जोड़ा है

ये सारा आकाश मेरे लिए छोटा है

मिले हैं जब दो मजबूत हाथ तुझे

कैसे कहता है कि नसीब तेरा खोटा है

मुस्करा के दर्द पी ले तो जीना है

वरना यहाँ हर कोई बस रोता है

हाथ बढ़ा कर बदल ले तकदीर

खुदबखुद यहाँ कुछ नहीं होता है l

कुछ मासूम सी आँखों ने …

कुछ मासूम आँखों ने हमें वो सब दिया

जो दुनिया भर के धर्मग्रंथों में नहीं मिला

एक मुस्कान से भर देते हो जान जमाने में

हंस के छू दो तो मुर्दों को फिर दो जिला

 

हम से पहले हुए होंगे कई पर क्यूँ लगता है

हमने तुमने ही शुरू किया प्यार का सिलसिला

प्यार दिया है हमने बदले में कुछ चाहा नहीं

तिजारती लोग ही करते हैं बेवफाई का गिला |

 

ज़िन्दगी तिजोरी में रखने की चीज़ नहीं …

चंद लम्हों की जान पहचान सही

दोस्त नहीं तो अजनबी अनजान सही

जिसके साथ साथ रहा सच्ची शान रही

क्या हुआ जो कोई अपना अज़ीज़ नहीं

सदा गुज़र के लिए खींचतान रही

कुर्ता नहीं तो खाली बनियान सही

दागदार पर मेरा गिरेबान नहीं

सीने पर दिखावे की कमीज़ नहीं

सफ़र का अंतहीन सिलसिला है

भारी कदमों से धरती का दिल हिला है

नम मौसम में गम धुला घुला है

कहीं यह दुःख ही तो सुख का बीज नहीं

बेवफाईयों से नहीं अब कोई गिला है

दुखों से मुझे बहुत कुछ मिला है

मुश्किलों में मन फूल सा खिला है

अब किसी से गुस्सा नहीं खीझ नहीं

न किसी को गिरवी रखी न उधार दी

अपनी मर्जी से बिगाड़ी या संवार ली

खुले आकाश तले हंस कर गुज़ार दी

ज़िन्दगी तिजोरी में रखने की चीज़ नहीं |